Wednesday, December 29, 2004

एटा में चोर बने कोतवाल

इन दिनों मामला बड़ा अजीब हो गया है। जिसे जो समझो, वो वह नहीं निकलता है । जिसे मॉडल समझो वो कॉल गर्ल निकलती है, जिसे धुरंधर टीम समझो वो फिसड्डी निकलती है, जिसे कहीं न गिनो वो ओलंपिक का राज्यवर्धन सिंह राठौर निकलता है और जिसे हिन्दुस्तानी पुलिस समझो वो चोर का बाप निकलती है।बहरहाल, इसी असमंजस के माहौल में उत्तर प्रदेश की एटा पुलिस ने एक अनोखी मिसाल कायम की है।उसने चोर और पुलिस का भेद खत्म कर दिया है। न....न.... न....आप गलत न समझें......एटा पुलिस ने खुद चोरी शुरु नहीं की है बल्कि उसने चोरों को शहर का कोतवाल बना दिया है। है न दिलचस्प कहानी। एटा में अब शहर के बदमाश पहरेदारी कर रहे हैं।पुलिस का मानना है कि जब चोर ही तिजोरी की रखवाली करेंगे तो उन्हें लूटेगा कौन।एटा पुलिस ने फिलहाल पहले चरण में शहर के 1600 नामजद मुजरिमों में से 300 मुजरिमों को ये जिम्मेदारी सौंपी है। पुलिस का कहना है कि अगर उन्हें सुधारने की ये कोशिश कामयाब रहती है तो धीरे-धीरे बाकी मुजरिमों को भी शहर का कोतवाल बना दिया जाएगा।भई मजा आ गया.....जब चोर बना कोतवाल तो अब डर काहे का....

Monday, December 27, 2004

एक त्रासदी से हिले, एक शर्म से झुके

26 दिसंबर......।कहने को तो भारत में ये रविवार का दिन था...यानी आराम का दिन। लेकिन देश में उदित हुई पहली किरण ही देशवासियों को संदेश दे गई कि 26 दिसंबर इतिहास में काले रविवार के रुप में तब्दील होने जा रहा है।चेन्नई के मरीना बीच पर समुद्र की ऊंची लहरों के कहर की खबरें आना शुरु हुई तो शाम तक समुद्री तूफान आतंक में बदल चुका था।क्या तमिलनाडु ,क्या आंध्र प्रदेश और क्या अंडमान.....मौत का आंकडा बढ़ता जा रहा था। सरकारी आंकडें कुछ भी कहें ,लेकिन सचाई में करीब चार हजार लोग मर चुके थे। दिल दहला हुआ था और टेलीविजन पर सिर्फ और सिर्फ समुद्री तूफान की ही खबरें प्रसारित होती रही। इसी दौरान, ढाका में भी कुछ घट रहा था। भारत बांग्लादेश से क्रिकेट में जूझ रहा था। पुछल्ले बल्लेबाजों की तमाम कोशिशें नाकाम साबित हुई और भारत 15 रनों से हार गया।बांग्लादेश ने पहली बार भारत को एकदिवसीय मैच में हरा दिया।धुरंधरों से भरी भारतीय क्रिकेट टीम के लिए इससे शर्मनाक और क्या हो सकता था। लेकिन...रविवार ही काला था...तो ये तो होना ही था। भारतीय क्रिकेट टीम के लिए राहत की बात सिर्फ यही रही कि समुद्री तूफान की त्रासदी ने भारत की इस शर्मनाक हार पर पर्दा ढक दिया। ...आप क्या सोचते हैं ?

ये कैसा मंदिर....

मंदिर और दरगाहो पर घड़ी , घंटे या शराब चढ़ाना तो आपने सुना होगा । लेकिन सूरत में एक ऐसा मंदिर है जहां भगवान को सिगरेट चढ़ाने का रिवाज है। वो भी जलाकर।है न मजेदार खबर।लेकिन जनाब ये बिलकुल सच है।सूरत के कतार गांव में एक ऐसा मंदिर है, जहां श्रद्धालु मन्नत पूरी होने की खातिर मंदिर में सिगरेट चढ़ाते हैं।ये मंदिर भावा देव का है और यहां ये रिवाज अरसे पुराना है।दिलचस्प बात ये है कि मंदिर के पुजारी भी मानते हैं कि भामा देव अगरबत्ती की जगह सिगरेट चढ़ाने से जल्दी खुश होते हैं। इस मंदिर में सबसे ज्यादा भीड़ अमावस्या के दिन होती है।उस दिन श्रद्धालुओ की जमात में भारी भीड़ तांत्रिको की होती है। बहरहाल,अगली बार अगर आप सूरत जाएं तो इस अनोखे मंदिर में दर्शन करना न भूलें।

Sunday, December 26, 2004

वाह रे स्पाइडरमैन...

ताइवान में एक युवक ने 101 मंजिली इमारत पर महज हाथ के सहारे चढ़ कर सबको चौका दिया । फ्रांस के एलेन रोबर्ट को ताईपेई की इस करीब 508 मीटर लम्बी इमारत पर चढ़ने में चार घंटे लगे। ऊंची इमारतो पर हाथ के सहारे चढ़ने में माहिर रोबर्ट को स्पाईडर मैन कहा जाता है। इमारत के ऊपर पहुचने पर उसने कहा कि ये उसके लिए भी हैरतअंगेज है। रोबर्ट के चढ़ते ही नीचे खड़े हजारो लोगो ने हाथ हिलाकर उसका स्वागत किया। इससे पहले रोबर्ट पेरिस के एफिल टावर,न्यूयार्क की एम्पायर स्टेट बिल्डिंग, सिडनी के ओपेरा हाउस और कुआलालम्पुर की दो ऊंची इमारतो पर चढ़ने में सफलता पाई है।
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