Monday, December 27, 2004

एक त्रासदी से हिले, एक शर्म से झुके

26 दिसंबर......।कहने को तो भारत में ये रविवार का दिन था...यानी आराम का दिन। लेकिन देश में उदित हुई पहली किरण ही देशवासियों को संदेश दे गई कि 26 दिसंबर इतिहास में काले रविवार के रुप में तब्दील होने जा रहा है।चेन्नई के मरीना बीच पर समुद्र की ऊंची लहरों के कहर की खबरें आना शुरु हुई तो शाम तक समुद्री तूफान आतंक में बदल चुका था।क्या तमिलनाडु ,क्या आंध्र प्रदेश और क्या अंडमान.....मौत का आंकडा बढ़ता जा रहा था। सरकारी आंकडें कुछ भी कहें ,लेकिन सचाई में करीब चार हजार लोग मर चुके थे। दिल दहला हुआ था और टेलीविजन पर सिर्फ और सिर्फ समुद्री तूफान की ही खबरें प्रसारित होती रही। इसी दौरान, ढाका में भी कुछ घट रहा था। भारत बांग्लादेश से क्रिकेट में जूझ रहा था। पुछल्ले बल्लेबाजों की तमाम कोशिशें नाकाम साबित हुई और भारत 15 रनों से हार गया।बांग्लादेश ने पहली बार भारत को एकदिवसीय मैच में हरा दिया।धुरंधरों से भरी भारतीय क्रिकेट टीम के लिए इससे शर्मनाक और क्या हो सकता था। लेकिन...रविवार ही काला था...तो ये तो होना ही था। भारतीय क्रिकेट टीम के लिए राहत की बात सिर्फ यही रही कि समुद्री तूफान की त्रासदी ने भारत की इस शर्मनाक हार पर पर्दा ढक दिया। ...आप क्या सोचते हैं ?

2 comments:

  1. Anonymous11:54 AM

    सारे न्‍यूज चैनल इस वर्ष की सर्वाधिक शर्मनाक एवं त्रासदीपूर्ण घटना की तलाश में लगे हैं परन्‍तु शायद ईश्‍वर नें सर्वाधिक शर्मनाक एवं त्रासदीपूर्ण घटना को वर्षान्‍त के लिए सम्‍भाल कर रखा था

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  2. हिन्दुस्तान है तो भाग्य को मानने वाला देश। पर उम्मीद है कि अगली बार तबाही से बचने के लिए जुगाड़ होगा।

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