Saturday, April 23, 2005

Vivekananda : His call to Nation

अभी कुछ ही दिनों पहले मैंने Vivekananda : His call to Nation नामक किताब पढ़ी, जो कि मुझे बहुत पसन्‍द आयी। मेरे पसन्‍दीदा अंश नीचे पढिए, साथ ही आशा है कि कॉपीराइट का कोई पेंच नहीं फंसेगा। (क्‍योंकि आप सभी अच्‍छी तरह से जानते हैं कि आशा ही जीवन है) :

जिसमें आत्‍मविश्‍वास नहीं है वही नास्‍तिक है। प्राचीन धर्मों में कहा गया है, जो ईश्‍वर में विश्‍वास नहीं करता वह नास्‍तिक है। नूतन धर्म कहता है, जो आत्‍मविश्‍वास नहीं रखता वही नास्‍तिक है।

संसार का इतिहास उन थोड़े से व्‍यक्‍तियों का इतिहास है, जिनमें आत्‍मविश्‍वास था। यह विश्‍वास अन्‍त:स्‍थित देवत्‍व को ललकार कर प्रकट कर देता है। तब व्‍यक्‍ति कुछ भी कर सकता है, सर्व समर्थ हो जाता है। असफलता तभी होती है, जब तुम अन्‍त:स्‍थ अमोघ शक्‍ति को व्‍यक्‍त करने का यथेष्‍ट प्रयत्‍न नहीं करते। जिस क्षण व्‍यक्‍ति अथवा राष्‍ट्र आत्‍मविश्‍वास खो देता है, उसी क्षण उसकी मृत्‍यु हो जाती है।

विश्‍वास-विश्‍वास! अपने आप पर विश्‍वास, परमात्‍मा के ऊपर‍ विश्‍वास – यही उन्‍नति करने का एकमात्र उपाय है। यदि पुराणों में कहे गये तेंतीस करोड़ देवताओं के ऊपर‍ और विदेशियों ने बीच-बीच में जिन देवताओं को तुम्‍हारे बीच में घुसा दिया है, उन सब पर भी तुम्‍हारा विश्‍वास हो और अपने आप पर विश्‍वास न हो, तो तुम कदापि मोक्ष के अधिकारी नहीं हो सकते।

यह कभी न सोचना कि आत्‍मा ‍के लिये कुछ असम्‍भव है। ऐसा कहना ही भयानक नास्‍तिकता है। यदि पाप नामक कोई वस्‍तु है तो यह कहना ही एकमात्र पाप है कि मैं दुर्बल हूं अथवा अन्‍य कोई दुर्बल है।

तुम जो कुछ सोचोगे, तुम वही हो जाओगे ; यदि तुम अपने को दुर्बल समझोगे, तो तुम दुर्बल हो जाओगे ; बलवान सोचोगे तो बलवान बन जाओगे।

मुक्‍त होओ, किसी दूसरे के पास से कुछ न चाहो। मैं निश्‍चित रूप से यह कह सकता हूं कि यदि तुम अपने जीवन की अतीत घटनाएं याद करो तो देखोगे कि तुम सदैव व्‍यर्थ ही दूसरों से सहायता पाने की चेष्‍टा करते रहे, किन्‍तु कभी पा नहीं सके ; जो कुछ सहायता पायी, वह अपने अन्‍दर से ही थी।

कभी ‘नहीं’ मत कहना, ‘मैं नहीं कर सकता’ यह कभी न कहना। ऐसा कभी नहीं हो सकता, क्‍योंकि तुम अनन्‍तस्‍वरूप हो। तुम्‍हारे स्‍वरूप की तुलना में देश-काल भी कुछ नहीं है। तुम्‍हारी जो इच्‍छा होगी वही कर सकते हो, तुम सर्वशक्‍तिमान हो।

ये संघर्ष, ये भूलें रहने से हर्ज़ भी क्‍या है ? मैंने गाय को कभी झूठ बोलते नहीं सुना, पर वह सदा गाय ही रहती है, मनुष्‍य कभी नहीं हो जाती। अतएव यदि एक बार असफल हो जाओ, तो भी क्‍या? कोई हानि नहीं, सहस्र बार इस आदर्श को हृदय में धारण करो और यदि सहस्र बार भी विफल हो जाओ, तो एक बार पुन: प्रयत्‍न करो।

उपनिषदों में यदि कोई ऐसा शब्‍द है जो वज्र-वेग से अज्ञान-राशि के ऊपर पतित होता है, उसे बिल्‍‍कुल उड़ा देता है, तो वह है ‘अभी:’ – निर्भयता।

हे मेरे युवक बन्‍धुगण! बलवान बनो – यही तुम्‍हारे लिए मेरा उपदेश है। गीता पाठ करने की अपेक्षा फुटबॉल खेलने से तुम स्‍वर्ग के अधिक समीप पहुंचोगे। मैंने अत्‍यन्‍त साहसपूर्वक ये बातें कहीं हैं और इनको कहना अत्‍यावश्‍यक है, कारण मैं तुमको प्‍यार करता हूं। मैं जानता हूं कि कंकड़ कहां चुभता है। मैंने कुछ अनुभव प्राप्‍त किया है। बलवान शरीर से और मज़बूत पुट्ठों से तुम गीता को अधिक समझ सकोगे।

केवल मनुष्‍यों की आवश्‍यकता है; और सब कुछ हो जाएगा, किन्‍तु आवश्‍यकता है वीर्यवान, तेजस्‍वी, श्रद्धासम्‍पन्‍न और अन्‍त तक कपट रहित नवयुवकों की। इस प्रकार के सौ नवयुवकों से संसार के सभी भाव बदल दिये जा सकते हैं।

दुन्‍दुभी नगाड़े क्‍या देश में तैयार नहीं होते? तुरही भेरी क्‍या भारत में नहीं मिलती? वही सब गुरु गम्‍भीर ध्‍वनि लड़कों को सुना। बचपन से जनाने बाजे सुन सुनकर, कीर्तन सुन सुनकर, देश लगभग स्‍त्रियों का देश बन गया है।

जिसका जो जी चाहे कहे, आपे में मस्‍त रहो – दुनिया तुम्‍हारे पैरों तले आ जाएगी, चिन्‍ता मत करो। लोग कहते हैं – इस पर विश्‍वास करो, उस पर विश्‍वास करो; मैं कहता हूं – पहले अपने आप पर विश्‍वास करो। अपने पर विश्‍वास करो – सब शक्‍ति तुम में है – इसकी धारणा करो और शक्‍ति जगाओ – कहो हम सब कुछ कर सकते हैं। ‘‘नहीं-नहीं कहने से सांप का विष भी असर नहीं करता।’’

3 comments:

  1. pratik mene ye kitab bahut pehle pari thi, dobara iske ansh parke bahut achha laga.....Vivekananda is one of my favorite...

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  2. rakesh jain10:58 PM

    bhisahab kya baat he .aaj me aastik hone ka matlab jaan gaya . ye patent copyright valo ne sarkar k sath milkar gyan ko pustkalyo me band kar diya he taki unhe padhkar apne log hi teacher ki nokari pa sake koi un par soche na na hi koi perana le . aapka bhoot bhoot dyanyvad .

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  3. Anonymous3:26 AM

    interesting article. swami vivekananda was so wise. check out www.gitananda.org for more quotes by vivekananda.

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