Friday, May 06, 2005

दर्शन शास्‍त्र और बे-सिरपैर की उड़ानें

… दुनिया दो तत्‍वों से बनी है – मन और जड़। तभी एक और आवाज़ आई – नहीं, दुनिया बनी है आकार और जड़ से। … ये सब युक्‍तिसंगत नहीं है, इस संसार में सब कुछ चिद्बिन्‍दुओं से निर्मित है। ‘जानना चाहते हैं कि ये सब क्‍या है … और आगे पढिए।’

… आत्‍मा सर्वव्‍यापी है। … अरे नहीं, हकीकत तो यह है कि आत्‍मा पीनियल ग्रन्‍थि में रहती है और वहीं से शरीर का नियन्‍त्रण करती है। … ज्ञान का आधार अनुभव है। … लेकिन यह अतार्किक मत है ज्ञान का आधार चिन्‍तन और सम्‍वेदन है।

आपका सर चकराने लगा और कुछ भी समझ नहीं आ रहा है। घबराइये नहीं, दर्शन शास्‍त्र पढ़ने वालों के साथ ऐसी दुर्घटना अक्‍सर होती है। एक सच्‍चे आगरा विश्‍वविद्यालय के छात्र की तरह मैंने भी पाठ्यपुस्‍तकें अन्‍तिम क्षणों में उठायीं और दार्शनिकों की मनमानी कल्‍पना की उड़ानों को बड़े धैर्य के साथ समझने की कोशिश की। लेकिन अपनी सारी शक्‍ति लगाने के बावजूद भी मैं परीक्षा में दार्शनिकों के 5 विषयों पर विभिन्‍न 500 मत याद नहीं रख सका। समाधान … मैं खुद ही दार्शनिक बन गया और जो भी मेरे मन में आंय-बांय कल्‍पना आई, उसे ही उत्‍तर के रूप में लिख दिया। उम्‍मीद है मुझे अच्‍छे अंक प्राप्‍त होंगे (साथ ही उम्‍मीद है कि परीक्षक सोते-सोते मेरे उत्‍तरों को जांचेगा)। Norman Vincent Peale की किताब The Power of Positive Thinking में जो कुछ पड़ा है, उसे इस्‍तेमाल करने का समय शायद अब आ गया है।

Thursday, May 05, 2005

हर साहित्‍यप्रेमी के द्वार पर हिन्‍दी ब्‍लॉग जगत

आप लोगों की मेहनत अब रंग लाने लगी है। हिन्‍दी ब्‍लॉग जगत धीरे-धीरे गुमनामी के अन्‍धेरे से निकल रहा है। प्रमुख साहित्‍यिक पत्रिका ‘का‍दम्‍बिनी’ ने हिन्‍दी ब्‍लॉग जगत को हर साहित्‍य प्रेमी के द्वार तक पहुंचा दिया है। मई के कम्‍प्‍यूटर विशेषांक में ‘चिट्ठा विश्‍व’ का नाम प्रमुख हिन्‍दी वेब साइटों की सूची में शामिल है और इसके बारे में पर्याप्‍त विवरण भी है। हिन्‍दी की प्रथम ब्‍लॉगज़ीन ‘निरन्‍तर’ का ‍उल्‍लेख भी किया गया है। ‍‍हांलाकि ‘चिट्ठा विश्‍व’ का URL गलत लिखा हुआ है। लेकिन रवि जी, यकीन मानिए कि ‘ब्लाँग’ की ही तरह यह भी टाइपिंग की ही गलती है।

Monday, May 02, 2005

आँखें खोलने वाले दो समाचार

आज सुबह उठकर जब मैंने अख़बार खोला, तो एक ख़बर पर नज़रें थम गयीं – ‘‘इंडोनेशियाई मुस्‍लिमों के नायकों में हैं राम, कृष्‍ण, हनुमान और गणेश।’’ इंडोनेशिया विश्‍व में सर्वाधिक मस्‍लिम आबादी वाला देश है, क़रीब 88 प्रतिशत मुस्‍लिम और 3 प्रतिशत हिन्‍दू इण्‍डोनेशिया में रहते हैं। वहां की मुद्रा पर ‘गणेश’ की छवि अंकित है। गगनचुम्‍बी इमारतों के बीच जगह-जगह हनुमान, राम, कृष्‍ण और अर्जुन (वैसे अर्जुन की मूर्ति आपने कहीं हिन्‍दुस्‍तान में देखी है?) की मूर्तियां स्‍थापित हैं, जिससे उनकी धर्मनिरपेक्षता पर कोई आंच नहीं आती। वहां के संस्‍कृति मंत्रालय ने डचों पर विजय के प्रतीक रूप में स्‍वतंत्रता मैदान में अर्जुन रथ स्‍थापित किया है। एशिया-अफ्रीका शिखर सम्‍मेलन में भाग लेने गये प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और उनके साथ गया भारतीय पत्रकारों का प्रतिनिधि मण्‍डल यह देखकर चकित रह गया।

शाम को टीवी पर एक दूसरी ख़बर देखी। BA II, दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय में पिछले 25 सालों से इतिहास की एक पुस्‍तक पढ़ाई जा रही है। लेखक श्री सि‍द्दकी के अनुसार गांधी जी का अहिंसा आन्‍दोलन हिन्‍दूवादी था और यह पराजय का प्रतीक है। सरदार पटेल हिन्‍दुओं से मिले हुए थे और साम्‍प्रदायिक दंगों को बढ़ावा देते थे। संघ फासिस्‍ट संस्‍था है और सरसंघचालक तानाशाह की तरह होता है। संघ की शाखाओं में दूसरे धर्मों के प्रति नफरत सिखाई जाती है। संविधान निहित हिन्‍दू स्‍वार्थों की रक्षा के लिए बनाया गया ‍था। सुभाषचन्‍द्र बोस ने फासिस्‍टों से दोस्‍ती करके भारी भूल की, उन्‍हें सोवियत रूस से दोस्‍ती करनी चाहिये थी जोकि दुनिया की सबसे बड़ी शक्‍ति है।

अब मुझे पूरा यकीन हो चला है कि भारत एक सेकुलर राष्‍ट्र है, साम्‍प्रदायिक मुल्‍क तो इण्‍डोनेशिया वगैरह हैं।
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