Wednesday, May 03, 2006

सबका अपना-अपना ‘स्‍टाइल’ है

आजकल टेलीविज़न पर मेरा पसन्‍दीदा कार्यक्रम है – द ग्रेट इण्डियन लाफ़्टर चैम्पियन्‍स। सास-बहू के रोने-धोने से दूर इस कार्यक्रम को देख आप दिल खोल कर हँस सकते हैं। इसमें कोई-न-कोई हर बार अलग-अलग अभिनेताओं की नक़ल करके ज़रूर दिखाता है। मेरे हिसाब से ऐसा इसलिये किया जा सकता है, क्‍योंकि हर अदाकार का अपना-अपना अन्‍दाज़ होता है।

जिस तरह हर अभिनेता की अपनी-अपनी स्‍टाइल होती है, ठीक उसी तरह हर दार्शनिक और आध्‍यात्मिक नेता का भी अपना ही ख़ास अन्‍दाज़-ए-बयां होता है। चाहे आप उनसे कोई भी प्रश्न क्‍यों न पूछिए, वे घूम-फिर कर अपने उसी एक केन्‍द्र पर आ जाते हैं।

कोई भी अजीबो-ग़रीब सवाल लीजिए, जैसे कि मान लीजिए प्रश्न है – हमें खर्राटे क्‍यों आते हैं और इससे छुटकारा पाने का क्‍या उपाय है? इस सीधे से सवाल का जवाब दार्शनिक घुमा-फिरा कर अपनी ही शैली में कैसे देते हैं, देखिए।

आचार्य श्री रजनीश के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। अगर यही प्रश्न आप ५ बार उनसे पूछेंगे, तो आपके दिमाग को चकरा देने वाले ५ भिन्‍न-भिन्‍न जवाब आपको मिलेंगे। वैसे, पहली बार सवाल किया है; तो निश्चित जानिये कि आपको बिल्‍कुल उल्‍टा उत्तर मिलेगा।
ओशो (Osho) – यह सवाल ही ग़लत है कि खर्राटों से छुटकारा कैसे पाया जाए। खर्राटे ही मनुष्‍य को परमचेतना से, सत्‍य से जोड़ते हैं। इसीलिये खर्राटे आते हैं, क्‍योंकि बिना चेतना के तादात्‍म्‍य के मनुष्‍य जीवित नहीं रह सकता। जागते समय हम मस्तिष्क और हृदय, इन दोनों चक्रों में ही रहते हैं; खर्राटा वह परम ध्‍वनि है, जो सोते समय गले में स्थित विशुद्धि चक्र से पैदा होकर नाक से होते हुए आज्ञाचक्र तक जाती है। इसीलिये तुम निद्रा के बाद गहन शान्ति का, परम आनन्‍द का अनुभव करते हो। अगर जाग्रत रहते हुए भी परम आनन्‍द चाहते हो, तो जागते हुए भी खर्राटे लेने का अभ्‍यास करो।

अब अगर किसी सवाल का उत्तर स्वामी विवेकानंद देंगे, तो बीच में ही आत्मा और उसकी महिमा ज़रूर घुस आएगी।
स्वामी विवेकानन्‍द (Swami Vivekananda) – हमने अपना नित्‍य मुक्त स्‍वभाव विस्‍मृत कर दिया है और स्वयं को देह मान बैठे हैं। इसलिये देह के विकारों को खुद के विकार समझते हैं। खर्राटे हमें नहीं आते, अपितु देह को आते हैं। हम नित्‍य तृप्त, अनन्त, सर्वशक्तिमान और पूर्ण आत्‍मा हैं – निरन्‍तर इसी भाव का चिन्‍तन करते रहो। आत्‍मसंस्‍थ हो और तुम जान जाओगे कि सिर्फ़ आत्‍मा का ही अस्तित्‍व है, देह का नहीं। अत: खर्राटे भी कल्‍पना मात्र है। वस्‍तुत: यही खर्राटों से छुटकारा है।

हाँलाकि रमण महर्षि से आपको अपने प्रश्न का उत्तर तो नहीं मिलेगा, लेकिन वो आपको सोचने के काम पर ज़रूर लगा देंगे।
रमण महर्षि (Raman Maharshi) – जानने का प्रयत्न करो खर्राटे किसे आते हैं? क्‍या खर्राटे तुम्‍हें ही आ रहे हैं या तुम्‍हारी सत्ता इस शरीर के परे भी है। यह ज्ञात हो जाना कि वास्तव में खर्राटे किसे आते हैं, इससे मुक्ति पाने का उपाय है।

जे कृष्णमूर्ति का एक ही सुर है – विचारों से किसी दिक्कत का समाधान नहीं होता। हर सवाल का जवाब ‘सोचने की शिक्षा’ से होते हुए अन्त में इसी सुर पर खत्‍म होगा।
जे कृष्णमूर्ति (J Krishnamurti) – हमें बचपन से यही शिक्षा मिली है, कि क्‍या सोचा जाए। लेकिन यह कभी भी नहीं सिखाया गया कि कैसे सोचा जाए। तुम किसी विशेषज्ञ से, मुझसे या अन्‍य किसी से इसका उत्तर जानना चाहते हो; लेकिन खुद चिन्‍तन नहीं करते। लगातार सतर्क रूप से अपने मस्तिष्क का अवलोकन करते रहो। तुम्‍हारे मस्तिष्क की गतिविधियाँ धीरे-धीरे खत्‍म होती जाएंगी और साथ ही तुम्‍हारी खर्राटों की और अन्‍य सारी समस्‍याएँ भी समाप्त हो जाएंगी।

वैसे तो सभी ईसाई प्रचारकों का यही अन्‍दाज़ होता है, लेकिन डॉ नॉर्मन विंसेंट पेल ने इस स्‍टाइल को ख़ासा लोकप्रिय बना दिया है।
नॉर्मन विंसेंट पेल (Norman Vincent Pale) – सकारात्‍मक सोच से सभी मुश्किलों पर विजय पायी जा सकती है। सकारात्‍मक भाव से अपनी आँखों में अश्रु भरकर प्रभु यीशू से प्रार्थना करो। वह तुम्‍हारी प्रार्थना ज़रूर सुनेगा और तुम्‍हारी समस्‍या को हल कर देगा। प्रभु के वचन दोहराते रहो – ‘‘यीशू और उनके शिष्‍य ‘पर्वत पर उपदेश’ के बाद शान्ति से सो गये।’’ (मैथ्‍यू 12/13) बाइबल के इस कथन को दोहराने से तुम्‍हें भी निद्रा में वही शान्ति प्राप्त होगी।

12 comments:

  1. अगर मुझसे यह प्रश्‍न किया जाय तो मेरी स्‍टाइल में जबाब यह होगा -

    तुम्‍हारा पढने में मन नहीं लगता और हर वक्‍त साने की सोचते हो। खर्राटों को भूलकर पढाई में ध्‍यान लगाओ।

    कैसी रही ?

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  2. बहुत ही सूक्ष्म अन्तर्दृष्टि सम्पन्न उत्तर है। :-)

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  3. बहुत ही बढिया!
    ओशो से यही सवाल दूसरी बार करोगे तो जवाब मिलेगा - "खर्राटे को आवलोकन भाव से देखो वो खुद ही तिरोहित हो जाएगा"!

    तीसरी बार "खर्राटे नाक का स्वाभाव हैं. खर्राटे ना आना खर्राटों की अल्पकालिक अनुपस्थिती है! यदी तुम्हारा अपनी नाक पर नियंत्रण है तो तुम्हारी इच्छानुसार लाए जा सकते हैं खर्राटों के बीच की अवधी को अभ्यास से बढाया जा सकता है और इस प्रकार खर्राटों की मात्रा कम की जा सकती है."

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  4. और हां स्वामी रामदेव जी बोलेंगे - "अनुलोम-विलोम प्राणायाम करो खर्राटे ८ दिन मे ठीक हो जाएंगे!" (और वो हो जाएंगे ठीक)

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  5. Anonymous7:17 AM

    किसी डाक्टर से मत पुछिएगा ,भर्ती कर आप्रेशन कर देगा और और हाथ में बिल थमा देगा

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  6. बढ़िया लिखा है ।

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  7. लो अब कुवैत वाले स्वामी जितेन्द्रानन्द से भी खर्राटा ज्ञान झेलो:

    देखो वत्स,ये वर्ड है ना वर्ड, इसमे दो तरह के लोग होते है, एक जिन्हे खर्राटे आते है, और दूसरे जिन्हे खर्राटे नही आते।जिन्हे आते है वो तो परमानन्द की अनुभूति करके सुखी रहते है और जिन्हे खर्राटे नही आते, वो ईष्या,द्वेष और जलन के मारे दुखी रहते है और व्यर्थ ही परेशान रहते हैं।खर्राटे तो यह मनुष्य के मन से ईष्या द्वेष को बाहर निकालने का साधन मात्र है वत्स, ताकि मनुष्य के मन से भरा ईष्या/द्वेष बाहर निकल जाए और परमानन्द की अनुभूति कर सके।


    नोट:ज्यादा जानकारी के लिये हमारे आश्रम मे सम्पर्क किया जाए।

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  8. ई-स्वामी जी,
    तारीफ़ के लिए शुक्रिया। आप तो इसी क्रम को बढ़ा कर पूरी प्रविष्टि ही लिख सकते हैं।

    अज्ञात जी,
    डॉक्टर ख़ुद ही सबसे ज़्यादा इस समस्या से ग्रस्त होते हैं, दूसरों का उपचार क्या करेंगे। :-)

    रत्ना जी,
    प्रशंसा के लिए बहुत धन्यवाद। अभी तक आपका ब्लॉग नहीं पढ़ा है। आकर देखता हूँ कि आपकी रसोई में क्या पक रहा है।

    स्वामी जितेन्द्रानन्द जी,
    इस अति-जटिल समस्या पर आपका दिव्य-ज्ञान प्राप्त कर हर्षातिरेक से मैं अचेतन होने वाला हूँ। वैसे बाद बाक़ी तो मालूम नहीं, लेकिन वर्ड में जो दो तरह के लोग हैं अगर उन्हें आजू-बाजू सोना पड़े तो खर्राटे न लेने वाले लोग जागते रहते हैं और उन्हें परम फ़्रस्ट्रेशन की अनुभूति ज़रूर होती है।

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  9. मैनें देखा है जब लोग यह तय कर के सोते हैं की आज मैं ख्रर्राटे नहीं मारूंगा तो उस रात उन्हे नहीं आती। मेरे अनुसार यदि व्यक्ति प्रतिदिन इसी संकल्प के साथ सोये तो एक दिन उसका यह अभ्यास खत्म हो जायेगा।

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  10. Anonymous10:59 AM

    put such funny quote or questions in panganale.com u will sure get good humore.

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  11. प्रतीक जी,
    ई-स्वामी जी से लिंक मिला. आकर पढा. बहुत शानदार पोस्ट है.

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  12. Anonymous10:57 PM

    great

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