Saturday, October 28, 2006

A Future with Hindi in Roman Script

रोमन लिपि के साथ हिन्दी का भविष्य

An example of Hindi written in Roman scriptकल अनुराग भाई ने रीडिफ़ के इस लेख की कड़ी दी – अ फ़्यूचर विद हिन्दी इन इंग्लिश स्क्रिप्ट। लेखक ने सम्भावना जताई है कि आने वाले समय में रोमन लिपि के ज़रिए हिन्दी को लिखा-पढ़ा जाएगा। लेखक के हिसाब से आज, जबकि हिन्दी एसएमएस और ई-मेल वगैरह रोमन में भेजे जा रहे हैं, तो ऐसे में हिन्दी और दूसरी भारतीय भाषाओं के लिए रोमन लिपि का प्रयोग बेहतर साबित होगा।

लेकिन मेरे ख़्याल से यह होना हाल-फ़िलहाल नामुमकिन ही है। क्योंकि हिन्दी के लिए देवनागरी इस वक़्त काफ़ी प्रचलित है। जो लोग नागरी में हिन्दी पढ़ने को लेकर सहज हैं, उनके मुक़ाबले आसानी से रोमन में एसएमएस और ई-मेल करने और पढ़ सकने वाले लोगों की तादाद काफ़ी कम है। इसके अलावा इनमें से भी ज़्यादातर लोग इसलिए रोमन का इस्तेमाल करते हैं, क्योंकि या तो उनके मोबाइल और कम्प्यूटरों में देवनागरी में लिखने की सुविधा नहीं है या फिर उन्हें इसके बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं है। रोमन में ई-मेल वगैरह लिखने वाले लोग खुद रोमन में पढ़ने की अपेक्षा देवनागरी में लिखा पढ़ने में ज़्यादा सहज हैं। इसका मतलब यह है कि रोमन का इस्तेमाल मजबूरी के कारण ज़्यादा होता है, बजाय कि अपनी पसंद से करने के।

लेखक ने यह भी तर्क दिया है कि जो चीज़ प्रचलित जो जाती है, उसे बदलना काफ़ी मुश्किल होता है। और जब कि रोमन का QWERT कुंजी-पटल प्रचलन में आ चुका है, इसलिए इसकी जगह देवनागरी के की-बोर्ड को बढ़ावा देना सम्भव नहीं होगा। हालाँकि इस तर्क में काफ़ी-कुछ सच्चाई है और कम्प्यूटर पर नागरी के प्रसार में विभिन्न की-बोर्ड ले-आउट की समस्या काफ़ी जटिल है, लेकिन फिर भी यह तर्क पूरी तरह ठीक नहीं है। क्योंकि अगर यह बात बिल्कुल सही है कि प्रचलित चीज़ को बदलना बहुत ज़्यादा मुश्किल होता है, तो फिर जबकि देवनागरी प्रचलन में है, इसे बदलना और हिन्दी को रोमन में लिखना ख़ासा मुश्किल काम साबित होगा। इसके अलावा तकनीक के विकास के साथ-साथ कम्प्यूटर पर हिन्दी आदि भारतीय भाषाओं में काम करना आसान होता जा रहा है। ऐसे में पहिए को फिर पीछे की ओर घुमा कर रोमन का प्रयोग चालू करना कितना सही होगा। मेरे ख़्याल से कुछ वर्षों में कम्प्यूटर पर हिन्दी को पढ़ना-लिखना उतना ही आसान होगा, जितना आज अंग्रेज़ी को पढ़ना-लिखना है। ग़ौरतलब है कि मनीष भाई अपने ब्लॉग 'एक शाम मेरे नाम' को मूलत: रोमन में ही लिखते थे और अभी भी उनके ब्लॉग का रोमन संस्करण काफ़ी पढ़ा जाता है। इस मुद्दे पर आप लोगों की क्या राय है?

टैग : , ,

16 comments:

  1. बकवास बात है। हिन्दी को देवनागरी में ही लिखा जाना चाहिए। जो है वही है।

    देखिए पहली बात जो जिसकी चीज उसीको सोहे... रोमन में हिन्दी कभी ढंग से पढी नहीं जा सकती.. sms ya email तक ठीक है। बाकि हिन्दी देवनागरी लिपि में ही बेहतर है।

    जो लोग हिन्दी को रोमन लिपि में लिखने के पैरोकार हैं उनकी मानसिकता गुलामी की है। हिन्दी की अपनी लिपि है और वही रहनी चाहिए... आज युनिकोड आने के बाद इतने सारे संजाल हिन्दी में भी बन गए हैं। तो रोमन में लिखने की क्या जरूरत है? और हमारी तो खुद की लिपि है.. कोई फ्रेंच या जर्मन या स्पेनिश थोडे ही है।

    ReplyDelete
  2. रोमन लिपि में अंग्रेजी तो ठीक से लिखी नहीं जाती हिन्दी क्या #$@& लिखी जाएगी.
    लिखोगे कमल, पढ़ोगे कमाल.

    ReplyDelete
  3. #$@& यह गाँधीगीरी बेचने वालो से प्रभावित शब्द हैं जो वे खुल्लमखुल्ला बोलते हैं, पर अपन तो सभ्य मानुस है, इसलिए कोड में लिखा है.

    ReplyDelete
  4. जहाँ तक हम कई चिट्ठा लिखने वाले लोगों की बात है, हमें देवनागरी में ही लिखना उचित जान पड़ता है। लेकिन बहुतायत में एसे लोग अभी भी हैं जिन्हें अपने कम्प्यूटर पर देवनागरी नहीं दिखाई देती, लिखना तो दूर की बात है। हिन्दी कीबोर्ड लेआउट आसानी से उपलब्ध नहीं है और लोगो के हाथों को देवनागरी से पहले रोमन की आदत हो जाती है।

    ReplyDelete
  5. हमें सच को तो स्‍वीकार करना ही चाहिए। आज तो हिन्‍दी भाषी लोगों नें वैसे ही एस एम एस और चैट रोमन में शुरु कर दी है। रोमन देवनागरी की एक मजबूत प्रतिस्‍पर्धी होने जा रही है। मेरे सैल फोन और मैसेंजर दौनों में देवनागरी की सुविधा है पर मैं तो रोमन ही प्रयोग करता है। क्‍या आप करते हैं ? तकनीक के भारत के कौने कौने में पहुंचने के साथ ही रोमन और मजबूत होगी।

    ReplyDelete
  6. रोमन हिन्दी लिखना जितना आसान है पढना उतना ही मुशकिल है

    ReplyDelete
  7. हिन्दी को अनौपचारिक रूप से रोमन में लिखा जाता रहेगा। औपचारिक रूप से हिन्दी हमेशा देवनागरी में ही लिखी जाती रहेगी। इस में कंप्यूटर के आने से रोक लग सकती थी, उलटा यूनिकोड ने आ कर इस में प्रगति के द्वार खोल दिए हैं। इस विषय पर कई चर्चा समूहों में बहुत वाद विवाद हुए हैं। उदाहरण के लिए यहाँ और यहाँ देखे।

    ReplyDelete
  8. यह सच है कि QWERT कुंजी-पटल प्रचलन में आ चुका है पर मैं तथा हम सब इसी कुंजी-पटल का ध्वनयात्मक ले-आउट में प्रयोग कर देवनागरी में टाइप करते हैं। मेरे विचार से जो बदलेगा वह केवल कुंजी-पटल का ले-आउट। यह रेमिंन्गटन या ईन्सक्रिप्ट की जगह ध्वनयात्मक ले-आउट हो जायेगा पर रहेगी देवनागरी ही।

    ReplyDelete
  9. अरे यार,

    मैं यह पक्का कह सकता हूँ की जिस मूर्ख ने यह लेख लिखा है, उसने शायद स्कूल की पढाई भी पूरी नहीं की होगी.

    इन मूर्खों को अपना कलम चलाने से पहले यह सोच लेना चाहिये की कहीं इनकी मूर्खता का खुले आम मजाक तो नहीं बनाया जायेगा.

    दुनिया की हर परेशानी को कुछ लाइनों के कोड से पूरी की जा सकती है. और यह तो फिर भी एक बहुत छोटी सी परेशानी है.

    इस प्रकार के मूर्खतापूर्ण सवाल शुरुआत में अंग्रेजी बोलने वाले पूछते थे. वह यह सोचते थे की सिर्फ 9 बटन से अंग्रीजी कैसे लिखी जा सकती है ??

    पर भैया, predictive entry, t9 जैसे सौफ्ट्वेअर ने 9 बटन से अंग्रेजी मे लिखना सम्भव बना दिया.

    उसी प्रकार से, हिन्दी में लिखने के लिये भी बहुत सारे predictive input सौफ्टवेअर आते हैं जिसकी सहायता से आप बिजली की गती से हिन्दी में लिख सकते हैं.

    शायद इन महाशय पास इतना दिमाग ही नहीं होगा की अपने मोबाइल में t9 चालू कर सकें.

    ये रहे कुछ लिंक:

    http://www.tegic.com/
    http://www.zicorp.com/eZiText.htm

    zi वालों ने अपना फ्लैश डेमो निकाल दिया है, वर्ना आप सब देख सकते थे की हिन्दी में लिखना कितना आसान हो जाता है अगर सौफ्ट्वेअर शब्दों को अपने आप ही पूरा कर देता है.

    वैसे भी, रेडिफ जैसे कचरा साइट पर अपना समय आप क्यों बर्बाद कर रहे हैं ???

    ReplyDelete
  10. शायद रोमन के खयाली पुलाव पकाने वाले लेखक को यूनिकोड के बारे मे जानकारी नही है। उनको बताने की जरूरत है कि यूनिकोड ने मैकाले के मानस-पुत्रों के सारे सपने चकनाचूर कर दिये हैं।

    ReplyDelete
  11. रोमन में हिंदी लिखने का मतलब है आपने भाषा की आत्मा को ही खत्म कर दिया।
    पढ़ने वाला भी उकताने लगता है।

    ReplyDelete
  12. रैडिफ के लेख की टिप्‍पणियां पढ़ना भी उपयोगी रहेगा, जैसे -

    Sub: Unscientific tests

    Your tests are at best anecdotal so please pass them off as sometihng really useful. The point for not using the Hindi characters is lack ...

    Posted by Prahaar


    Sub: Roman script

    The opportunity to provide a uniform script to all Indian languages was lost way back at Independence time. The need of the hour is nurturing ...


    Posted by Shankar


    Sub: Indian Languages in a common script

    It is a great idea whose time has come. We should perhaps use the Roman and Devanagari scripts for ALL the Indian languages. With the ...


    Posted by venkataraman

    Sub: So what?

    Let the devnagari script be lost forever. Let everyone in the world convert to one language, one script, one religion, etc. I don't see why ...


    Posted by Aashish Gupta


    Sub: Hindi in English script

    This piece of news does no surprise me really. Many countries have attempted that, and also have simplified their scripts with varying degrees of success. ...


    Posted by Amitava

    ReplyDelete
  13. ये सच है कि हमारे लिये देवनागरी की जगह कोई और लिपि नहीं ले सकती, मगर ये कहना कि रोमन में हिन्दी जेहनी गुलामी है, अनुचित होगा | मेरे विचार में रोमन में हिन्दी लिखने के कई लाभ हैं

    १. सारे हिन्दुस्तानी हिन्दी पढ सकेंगे , और दूसरी तरफ हर साक्षर व्यक्ति अंग्रेजी भी पढ सकेगा
    २. उर्दू गुजराती पंजाबी और बांग्ला सरीखी भाषाओं का हिन्दी में उचितरूपेण समागम हो सकेगा
    ३. उत्तर भारतियों को एक ही लिपि की रीडिंग स्पीड की फिक्र करनी होगी

    मेरे विचार रीडिफ के लेखों से कभी मेल नहीं खाते, और वैसे भी, मैं रोमन में लिखने के लिये कोई "तकनीकी" कारण बताना बकवास समझता हूँ | अलबत्ता मैंने खुद मजाकिया तौर पर खुद इस विषय पर कुछ जरूर लिखा था |

    http://anuragr.blogspot.com/2005/10/script-kiddos.html

    ReplyDelete
  14. चिंता नहीं.. उस रिडिफ़ के लेखक को मेल कर दिया है. अगली दफ़ा उंगली करे तो बताना.. गांधीगीरी छोड़कर गुलदस्ते में बम डाल दूंगा.

    ReplyDelete
  15. I was going through the malay language on wikipedia and found that it is also written in roman though it's root are also in arabic and sanskrit. it gives another reason to think that rediff article has some basis to say that. Here is the widipedia on malay language - http://en.wikipedia.org/wiki/Malay_language

    ReplyDelete

Related Posts with Thumbnails