Sunday, December 31, 2006

Mirza Ghalib's Home Disappeared

मिर्ज़ा ग़ालिब का घर हुआ ग़ायब

Mirza Ghalib's Home Kalan Mahalमहान उर्दू शायर मिर्ज़ा ग़ालिब आगरा में पैदा हुए थे। हाल में सारे देश में उनका जन्मदिन मनाया गया। अगर आप आगरा में किसी से पूछें कि मिर्ज़ा ग़ालिब कहाँ पैदा हुए थे, तो शायद ही कोई आपको बता पाएगा। दरअसल सारा दोष पुरातत्व विभाग का है, जिसने ग़ालिब के जन्म-स्थल को बचाने की कोई कोशिश नहीं की।

शहर के इतिहासकार और वयोवृद्ध बताते हैं कि कालां महल इलाक़े में एक बड़ी हवेली हुआ करती थी, जहाँ सन् १७९७ में ग़ालिब का जन्म हुआ था। लेकिन कालां महल इलाक़े में कोई भी उस जगह के बारे में पक्के तौर पर नहीं कह सकता, जहाँ मियाँ ग़ालिब का जन्म हुआ था। हालाँकि एक इमारत है, जो ग़ालिब की हवेली की ली गई एक बहुत पुरानी तस्वीर से मिलती-जुलती है। बचपन में मुंशी शिव नारायण को ग़ालिब द्वारा लिखे गए एक पत्र से उनकी हवेली के बारे में जानकारी मिलती है, जिसमें उन्होंने अपने घर के बारे में काफ़ी कुछ लिखा है। उन्हीं को लिखे एक अन्य ख़त में उन्होंने आर्थिक तंगी के चलते पैतृक सम्पत्ति छोड़ने की इच्छा का भी उल्लेख किया है। उन्होंने अपनी सम्पत्ति १८५७ के गदर के आस-पास सेठ लक्ष्मीचंद को बेच दी थी।

अब एक स्कूल ट्रस्ट उस सम्पत्ति का मालिक है, लेकिन ट्रस्ट प्रबंधन के मुताबिक़ उस सम्पत्ति का ग़ालिब से कुछ लेना-देना नहीं है। पुराने रिकॉर्ड के मुताबिक़ वहाँ जो ख़ूबसूरत बग़ीचा था, वह कब का ग़ायब हो चुका है और अब वहाँ एक बड़ा सा पानी का टेंक है। इमारत के वर्तमान मालिक के हिसाब से ग़ालिब का उस भवन से कोई सम्बन्ध नहीं है। हालाँकि तथ्य कुछ और ही बयान करते हैं। १९५७ में ग़ालिब की सालगिरह के मौक़े पर मशहूर उर्दू शायद मैकश अकबराबादी की एक तस्वीर है, जो प्रधानाचार्य के वर्तमान दफ़्तर के ठीक सामने ली गई है।

ग़ालिब से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम १९६० तक बाक़ायदा वहीं आयोजित किए जाते रहे हैं। ट्रस्ट द्वारा बड़े पैमाने पर की गई तोड़-फोड़ और निर्माण के चलते अब भवन काफ़ी बदल चुका है। विख्यात शायर फिराक़ गोरखपुरी और अभिनेता फ़ारुक़ शेख़, जिन्होंने ग़ालिब पर एक फ़िल्म का निर्माण किया था, भी इस इमारत को देखने आए थे। ऐतिहासिक तथ्य पुख़्ता तौर पर इशारा करते हैं कि वही भवन मिर्ज़ा ग़ालिब का जन्मस्थल है, जहाँ आज एक गर्ल्स इंटर कॉलेज चल रहा है। हालाँकि इस बारे में अभी और शोध की ज़रूरत है कि क्या वही इमारत ग़ालिब की पुश्तैनी हवेली है।

To read this blog post in English, please click here.

सम्बन्धित आलेख:
१. Why are girls scared of visiting Elephant tower?

11 comments:

Udan Tashtari said...

ऐतिसाहिक इमारतों की फजीहत तो हमेशा से होती आ रही है. अभी शताब्दी समारोह की चहल पहल है, फिर जो रहा सहा है, वो भी नमस्ते ही समझो. बहुत दुख होता है इस तरह की घटनायें देखकर.

Udan Tashtari said...

उपर शदाब्दी को जन्म दिन समारोह पढ़ा जाये

DR PRABHAT TANDON said...

यही हाल लखनऊ मे बेगम अख्तर के घर के साथ भी हुआ।

Pankaj Bengani said...

bahut dukh hua... par.. india hai.. its ok

भुवनेश शर्मा said...

भैया कमजोर आर्थिक स्थिति वालों को हिन्दुस्तान में कोई नहीं पूछता।
या फ़िर ये कहें कि हिन्दुस्तान में लिखने वालों की आर्थिक स्थिति कमजोर ही होती है। मुंशी प्रेमचंद का ही उदाहरण लें। किसी को नहीं पता उनका निवास-स्थान किस हालत में है|

Manish said...

बड़े दुख की बात है !

श्रीश । ई-पंडित said...

वैसे तो गालिब जन-जन के दिल में बसे हैं लेकिन ऐसी ऐतिहासिक इमारतों को संजोए रखना हम सब का फर्ज है जो खेद की बात है कि निभाया नहीं जा रहा।

Divine India said...

hai,i hv visited ur blog first time n feel i m not in a wrong place,u hv given a smart work of lost Angle of india.Thnx

yogesh said...

Pratik,

I appreciate your response on my blog. Unfortunately I would say you have taken wrong message from that.
I have just underlined the fact that it is very important for an immigrant to learn the reginal language of the region he is migrating to.
It is beneficial for himself as well as for the local people since he is helping to protect the rich lingual heritage of India

Major 21 languages are national languages. The board doesn't say anything other than what is already mentioned in the constitution.
http://en.wikipedia.org/wiki/List_of_national_languages_of_India

Nitin hindustani said...

मिर्जा गालिब साहब का लोगों को पता तो था कि वह रहते कहा थे, आने वाली पीढ़ी को ये भी पता नही होगा कि गालिब रहते कहा थे,

हिमांशु said...

माफ करियेगा, पर क्या कोई बता सकता है की यह मिरजा गालिब आखिर था कौन भाई ??

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