तिब्बत के प्रमुख लामा को बुद्ध का अवतार माना जाता है। हर मुख्य लामा अपनी मृत्यु से पूर्व उन संकेतों की घोषणा करता है, जिनके आधार पर तिब्बत में उसे फिर से पैदा होने पर खोजा जाता है। यह परम्परा सदियों से चली आ रही है। चीनी सरकार ने हाल में यह बयान जारी किया है – “बिना सरकारी अनुमति के तथाकथित जीवित बुद्ध यानी दलाई लामा का पुनर्जन्म असंवैधानिक और ग़ैरक़ानूनी है।” यह आदेश १ सितम्बर २००७ से प्रभावी होगा।यानी कि अब बेचारे दलाई लामा को तिब्बत में फिर से पैदा होने के लिए चीनी सरकार की अनुमति लेनी होगी और चीन की वामपंथी सरकार, जो धर्म में यक़ीन नहीं रखती, यह तय करेगी कि दलाई लामा को कब और कहाँ जन्म लेना होगा। दरअसल चीन की सरकार बुद्ध को फिर से पैदा नहीं होने देना चाहती है और इस परम्परा को हमेशा के लिए ख़त्म करना चाहती है, ताकि तिब्बत पर पकड़ को मज़बूत किया जा सके। देखते हैं लोकतांत्रिक भारत में रह रहे बुद्ध चीन की साम्यवादी सरकार का कैसे मुक़ाबला करते हैं?
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8 comments:
जितना तर्क संगत मुख्य लामा का भविष्य दर्शन है, उतना ही तर्क संगत चीन सरकार का फ़रमान होगा!
ईश्वरीय विधान को कौन बता या बांध सकता है?
खुशबू कहीं मुठ्ठी में कैद होती है भला? जब बुद्ध को अवतार लेना होगा वे किसी देश की सरकार से नहीं रुक पायेंगे।
वैसे इस पोस्ट को पढ़ कर हसने का मन कर रहा था पर रूक गया कि कहीं आप बुरा न मान जाओं :)
पोस्ट पर विज्ञापन चढ़ा दिख रहा है. पढ़े कैसे?
सही है -आगे आगे देखिये, होता है क्या?
मैं भी आपको शायद एक बार पहले कह चुका हूँ कि आपका यह विज्ञापन बहुत परेशान करता है, लेख को पढ़ने के लिये टिप्प्णी वाले पेज पर जाना पड़ता है, अच्छा हो यदि आप इसकी जगह बदल दें।
हा हा, मैं हँसी रोक नहीं सकता। क्या चीन सोचता है कि इस तरह वह दलाईलामा का पुनरावतार अपनी मर्जी से करवा सकेगा। पहले भी वह कई लामा अपनी तरफ से घोषित करवा चुका है, पर बौद्ध जनता ने उन्हें कभी स्वीकार नहीं किया।
@ सागरजी
शायद विज्ञापन 800x600 रिज़ोल्यूशन में समस्या पैदा कर रहा है। इसे जल्दी ही हल करने की कोशिश करता हूँ। वैसे, विज्ञापन के ऊपर Remove Ad विकल्प है, जिससे विज्ञापन को हटाया जा सकता है।
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