Monday, September 10, 2007

क्रांतिकारियों के लिए सूत्र : जॉर्ज बर्नार्ड शॉ

famous author george bernard shaw“क्रांतिकारियों के लिए सूत्र” जॉर्ज बर्नार्ड शॉ या जीबीएस, जैसा कि आम तौर पर उन्हें कहा जाता है, की सबसे कम चर्चित रचनाओं में से एक है। जीबीएस ने १९०३ में यह संक्षिप्त किताब लिखी थी। इस किताब में विभिन्न विषयों पर छोटे-छोटे सूत्र दिए गए हैं। मुझे इसकी ख़ासियत यह लगी कि इसके गूढ़ सूत्र जगह-जगह व्यांग्यत्मक लहज़े से भी परिपूर्ण हैं। इस किताब के सूत्रों के बारे में यह बात बिल्कुल सही लगती है – “देखन में छोटे लगें, घाव करें गम्भीर”। उदाहरण के लिए सबसे पहले सूत्र पर ही ग़ौर फ़रमाएँ –

एकमात्र स्वर्णिम सूत्र यह है कि कोई भी स्वर्णिम सूत्र नहीं है।
(The only golden rule is that there are no golden rules.)

शिक्षा पर जीबीएस कहते हैं –

जो कर सकता है, वह करता है और जो नहीं कर सकता, वह पढ़ाता है।
(He who can, does. He who cannot, teaches.)

पढ़ा-लिखा इंसान दरअसल एक फ़ालतू व्यक्ति है, जो पढ़ने में वक़्त बर्बाद करता है। उसके झूठे ज्ञान से सावधान रहो : यह अज्ञान से भी ख़तरनाक है।
(A learned man is an idler who kills time with study. Beware of his false knowledge : it is more dangerous than ignorance.)

खुद करके देखना ही ज्ञान अर्जित करने का अकेला मार्ग है।
(Activity is the only road to knowledge.)

भाषा पर जीबीएस ने बहुत मार्के की बात कही है, जो भारत के आज के हालात में बहुत सही बैठती है –

कोई भी इंसान जो खुद अपनी भाषा में सक्षम नहीं है, कभी भी दूसरी भाषा पर अधिकार प्राप्त नहीं कर सकता।
(No man fully capable of his own language ever masters another.)

यह किताब इंटरनेट पर भी उपलब्ध है। आप इसे यहाँ पढ़ सकते हैं –
क्रांतिकारियों के लिए सूत्र : जॉर्ज बर्नार्ड शॉ

नोट : इन सूत्रों का हिन्दी भावानुवाद मैंने किया है। इसलिए हो सकता है कि इनमें ग़लतियाँ रह गई हों। तो आप टिप्पणी करके बताएँ, इससे पहले ही मैं एड्वांस में माफ़ी मांग लेता हूँ। :)

पढ़िए किताबों से जुड़ी कुछ और पोस्ट्स -
१. मुफ़्त डाउनलोड करें हिन्दी ई-किताबें और साहित्य
२. ऑनलाइन हिन्दी साहित्य
३. हिन्दी पत्रिका "हंस" इंटरनेट पर

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9 comments:

  1. बड़े अच्छे लिंक देने के लिये धन्यवाद.

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  2. अच्‍छी जानकारी

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  3. "जो कर सकता है, वह करता है और जो नहीं कर सकता, वह पढ़ाता है।
    (He who can, does. He who cannot, teaches.)"

    अनुवाद अच्छा किया है ! एक और मजेदान अनुवाद:

    जिसमें कुव्वत है वह कर्मठ बन जाता है, बाकी जाकर अद्यापक बन जाते हैं !!

    -- शास्त्री जे सी फिलिप


    हे प्रभु, मुझे अपने दिव्य ज्ञान से भर दीजिये
    जिससे मेरा हर कदम दूसरों के लिये अनुग्रह का कारण हो,
    हर शब्द दुखी को सांत्वना एवं रचनाकर्मी को प्रेरणा दे,
    हर पल मुझे यह लगे की मैं आपके और अधिक निकट
    होता जा रहा हूं.

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  4. प्रतीक भाई ,
    मैं लगातार प्रतिक्रिया नहीं दे पाता हूं इसके लिए क्षमाप्रार्थी हूं। यहां अच्छी जानकारियां मिल रही हैं। इस पोस्ट में भी आपने अच्छी सूचनाएं उपलब्ध कराई हैं। शुक्रिया।

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  5. प्रतीक क्या जानकारियां दी हैं आपने। पहली बार आपते ब्लॉग पर आया, अच्छा लगा।

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  6. संजय बेंगाणी9:17 AM

    बहुत खुब. सही चीज उठा कर लाये है. लिंक के लिए धन्यवाद.

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  7. aजियो प्यारे भौत धांसू च फांसू काम किया है।

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  8. शुक्रिया जानकारीयां देने के लिए।

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