Sunday, September 09, 2007

मदर टेरेसा : टीस से भरी एक ज़िन्दगी

Mother Teresa of Calcutta : Shaken faithमदर टेरेसा आज भी दुनिया के लिए एक मिसाल हैं। उन्होंने दिखलाया कि किस तरह अपना सर्वस्व समर्पित कर दीन-हीनों और निराश्रितों की सेवा की जाती है। लेकिन हाल में आई एक किताब “मदर टेरेसा : कम बी माई लाइट” (Mother Teresa : Come Be My Light) ने ईश्वर पर उनकी आस्था को लेकर नए सवाल खड़े किए हैं। किताब में मदर के कई ख़तों को प्रकाशित किया गया है, जिससे यह पता लगता है कि अपनी ज़िन्दगी के आख़िरी वक़्त तक वे ईश्वर के अस्तित्व को लेकर संशय में थीं। इन ख़तों में बार-बार मदर ने कहा कि उन्हें महसूस होता है कि ईश्वर नहीं है, क्योंकि उन्हें न तो कभी उसकी अनुभूति हुई और न ही कभी प्रार्थनाओं का जवाब मिला। क्रिसमस के बाद लिखे गए एक पत्र में मदर टेरेसा ने लिखा, “मेरे लिए सन्नाटा और खालीपन बहुत गहरा है। इतना गहरा कि मैं देखना चाहती हूँ और देख नहीं पाती, सुनना चाहती हूँ और सुनाई नहीं देता।”

ये सभी पत्र ऐसे लोगों को लिखे गए थे, जो उनके बहुत क़रीबी थे। सार्वजनिक तौर पर उन्होंने हमेशा इस तरह दर्शाया मानो उन्हें अपेक्षित अनुभूति हो चुकी है। क्या यह मज़हबों के पाखण्ड को नहीं दिखलाता है? हालाँकि उनका कार्य निश्चय ही महान था, लेकिन अगर वे यह कहतीं कि ईश्वर नहीं है तो क्या चर्च उन्हें मान्यता देता? क्या अपने जीवन के अंत में भी पाखण्ड की पीड़ा के साथ नहीं मरी होंगी? हालाँकि उनका काम महान था, लेकिन क्या यह टीस उससे भी बड़ी नहीं रही होगी? ईश्वर की बहुतेरी अजीबोग़रीब धारणाएँ गढ़ कर और उसे आस्था के जर्जर आधार पर टिकाकर, क्या मज़हबों ने लोगों को छला नहीं है? क्या बेहतर न होता कि ईसा के नाम पर लोगों की सेवा करने की बजाय वे खुद अपने लिए इसे छोड़ सत्य को खोजने का साहस करतीं? शायद ऐसा करने से वे मरते वक़्त ज़्यादा संतुष्ट होतीं। अंत में मदर की एक प्रसिद्ध कविता Anyway की पंक्तियाँ -

People are often unreasonable, illogical and self centered;
Forgive them anyway.

If you are kind, people may accuse you of selfish, ulterior motives;
Be kind anyway.

If you are successful, you will win some false friends and some true enemies;
Succeed anyway.

If you are honest and frank, people may cheat you;
Be honest and frank anyway.

What you spend years building, someone could destroy overnight;
Build anyway.

If you find serenity and happiness, they may be jealous;
Be happy anyway.

The good you do today, people will often forget tomorrow;
Do good anyway.

Give the world the best you have, and it may never be enough;
Give the world the best you've got anyway.

You see, in the final analysis, it is between you and your God;
It was never between you and them anyway.

लेकिन जब खुद मदर और “उनके भगवान” के बीच ही वास्तविक विश्वास का रिश्ता न क़ायम हो सका, तो क्या ये अंतिम पंक्तियाँ खोखलेपन की गूंज नहीं लगती हैं?

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15 comments:

  1. Anonymous9:13 PM

    BIG question!

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  2. भाई मैं ही नही मुझ जैसे अनगिनत लोग ये सब बातें नही समझेंगे, हम समझते हैं तो बस इतना कि मदर टेरेसा सेवाभाव की एक मिसाल थीं, हैं और रहेंगी!!!
    न भूतो व भविष्यति!!

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  3. कितनी बड़ी विडंबना है कि स्वयं उनके शब्दों में उन्हें ईश्वर की उपस्थिति का प्रमाण नहीं मिला (मुझ जैसे सेंकड़ों को भी कभी नहीं मिला) पर उन्हें संत घोषित करने के लिये उनके चाहने वालों को पैपल समिति को उनके ईश्वर से साक्षात्कार के पाखंडपूर्ण प्रमाण देने पड़े।

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  4. बहुत अच्छे.. सही सवाल..

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  5. मदर टेरेसा के लिए न भूतो न भविष्यती !!!!

    अहो आश्चर्यम!

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  6. जरा एक नजर इस लिंक पर भी डाल लीजियेगा, शायद आपके विचारों में कुछ खलबली हो… http://sureshchiplunkar.blogspot.com/2008/01/congress-madarsa-tricolour-and-bribe.html

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  7. माफ़ कीजिये पहली टिप्पणी में गलत लिंक चला गया, कृपया इसे जरूर देखें…
    http://sureshchiplunkar.blogspot.com/2007/12/mother-teresa-crafted-saint.html

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  8. i love mother terasa

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  9. Anonymous1:11 AM

    mother teresa was a great lady.we never forget her work.

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  10. i really admire and deeply respect mother teresa

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  11. Anonymous10:32 AM

    everybody have their feeling who we r to criticize them

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  12. Anonymous3:58 PM

    she is a great women of india

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  13. Anonymous10:28 AM

    bagwaan ko to kisi ne nahi dekha , per phir b sab viswas karte hai or jab ye viswaas bad jaye to aandviswaas kahalata hai . india mai aandviswaas ki koi kami nahi hai.

    viswaas karo aandviswaas mat karo.

    ek shakti hai jo insaan ko jeene or marne ke baare mai sochne mai majboor karti hai. aap sabko apna karm karna chayie , ye mat socho ki kyo ,
    paawan delhi

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  14. Anonymous8:03 PM

    itna acha kahi nahi deka he
    app ne hame hindi project se bacha liya
    thank u

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  15. Anonymous12:21 PM

    insan apne guno se, sat karmo se saint banta hai na ki bhagwan ko manne se ya na manne se

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