Tuesday, February 12, 2008

राज ठाकरे और राजनीति का विकास

- एक -

पहले राजनेता नहीं थे। शुरूआती होमोसेपियंस ने दुनिया में जहाँ चाहा, वहाँ अपना तम्बू गाड़ा और वहीं रहने लगे।
फिर धीरे-धीरे शुरुआती राजनेता आए और देश बने। एक देश से दूसरे देश में जाना दूभर हो गया। किसी गढ़रिए ने बॉर्डर क्रॉस किया तो पुलिस पकड़ने लगी।
फिर आए राज ठाकरे टाइप लोग... एक राज्य से दूसरे राज्य में आना-जाना मुश्किल हो गया। गए तो ठोंक-बजा दिए गए।
अब लगता है कुछ दिनों में शहरों की दिक़्क़त आएगी... आगरा से मथुरा गए तो पिटाई हो जाएगी।
फिर राजनीति और आगे बढ़ेगी... प्रांतवाद के बाद मुहल्लावाद भी आएगा। ये सोचकर कॉलेज के मेरे नॉट-सो-गुड-फ़्रेण्ड्स बहुत ख़ुश हैं। अगर मैं छिपीटोले गया, तो मेरा घण्टा बजाने का मौक़ा मिलेगा। मैं भी ख़ुश हूँ... मुझे भी मौक़ा मिलेगा।
इसके बाद गलीवाद भी आएगा... सामने वाली गली में गए ग़लती से तो भरपूर प्रसाद देकर वापस भेजा जाएगा।
फिर शायद राजनीति और विकसित होगी... चूँकि पड़ोसी मनसे का कार्यकर्ता होगा, तो उसके आंगन में गेंद उठाने जाना ख़तरे से खाली नहीं होगा।
आपको भले ये ख़याली पुलाव लगे, लेकिन मुझे राजनीति और राजनेताओं पर पूरा भरोसा है... भविष्य में घर के एक कमरे से दूसरे कमरे में जाना भी ख़ामख़्वाह का ख़तरा मोल लेना होगा।
इसके आगे समझ नहीं आ रहा कि राजनीति कैसे विकसित होगी... आप भी सोचिए और बतलाइए।

- दो -

राज ठाकरे का मराठियों को भूमिपुत्र कहना ग़लत है। भूमिपुत्र तो यूपी-बिहार वाले भी हुए परिभाषा के हिसाब से, इर्रेस्पेक्टिव ऑफ़ कोई कहीं भी रहे। मेरे ख़्याल से राज्य-पुत्र सरीखा कुछ होना चाहिए।
फिर राजनीति के विकास के साथ –
शहर/क़स्बा/गांव पुत्र
मोहल्ला-पुत्र
गली-पुत्र
मकान-पुत्र
कमरा-पुत्र
आगे आप सोचिए।

15 comments:

  1. भइया, हमें अपने ट्रेन के बुकिंग काउण्टर के बगल में ढ़ेरों पासपोर्ट दफ्तर खोलने पड़ेंगे - राज ठाकरे का पासपोर्ट दफ्तर (बाकी भी ढ़ेरों नाम आप जोड़ लें)! और पहले आप पासपोर्ट पर ठप्पा लगवायें फिर टिकट मिलेगा! :-)

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  2. ये बात तो आनी ही थी.. बहुत सही..

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  3. वेरी इंटरेस्टिंग. वेरी वेरी भूमिपुत्र एंड गॉड नोज़ व्‍हाट नॉट इंटरेस्टिंग.

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  4. ये खेल खत्म कब होगा?

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  5. सटीक नज़र डाली है!!

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  6. Logon ko pahale ye baat sochni chahiye ki Raj Thakare ko ye baat aakhir kyo karni padi. Ye baat to sach hai ki koi bhi bharat ka nagrik desh me kisi bhi jagah aa-ja sakta hai.

    Lekin agar wo apna ghar, gav chodkar dusare rajya me jakar waha hi apana dera jamne lage to ye galat hai.

    Agar hamre ghar apne koi ristedar aaye to hume kuch dino tak achha lagega. Par agar wo baad me khud yaha hi rahane ki soche aur upar se apane aur 100 rishtedaro ko saath me leke aaye to kya hum in subko apne ghar me kayam vatyvya ke liye sama sakate hai? kabhi nahi ! Kyonki apne ghar ki utni capacity hi nahi hai? To phir bhai Raj Thakare ne kya galat kaha?

    Aur ye sab aag media ki lagai hui hai. Hume ye jaan lena chahiye aur is mamle ko jyada tul nahi deni chahiye.

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  7. आपने जो कहा है उससे मैं पूरी तरह से सहमत हूँ.......पूंजीवादी लोकतंत्र मे इन्सान समान और स्वतन्त्र नहीं रह सकता.आप अपना ब्लोग जिस वैज्ञानिक दृष्टी से लिक रहे है उससे हमें प्रेरणा मिलती है....चंद्रपाल मुम्बई

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  8. "Bhaiya .. hame bambai jaana hai"

    "kyo bhai"

    "yaha pe to hamare rajnetaaone hame booka aur nanga aur bheekhmanga bana ke rakha hai ... suna hai marathi logo ne kafi vikas kiya hai maharashtra me .. chalo waha pe jaake malai khaye thodi ... "

    "waise to gujraat, tamilnadu bhi to vikasit hai"

    "are bhaiyaa ... lekin bambai me to apani lobby hai .. kafi factories lagi hai jisame apane chacha-mama bharti hai .. ye ishtihar dekho .. workers chahiye saste me .. aur hamare raajneta bhi waha pe aake bhasad machate hai ... to hame waha pe koi darr nahi .. aur tamil, gujrat me jaaye to bhasha seekhani padegi ... marathi log to waise seedhe hote hai ... hindi bol lete hai"

    "ha .. chalo chalo .. bambai chalo ... apana state to narak banaya hamne ... ab maharashtra ko bhi banate hai"

    Guys ... we are good people .. just we cannot tolerate outsiders .. let them be Britishers, Mughals ... You guys be like us and your state will be developed. There is only one difference between you and us .. We love our state and want to live here ... and you don't .. neither you want to stay in UP/Bihar.

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  9. बहुत पहले राजपूत भी ऐसे ही अपनी अपनी ठीया के लिए लडते थे। और गोरी जैसे लोग आए ,अन्ग्रेज़ आए। और हम लोगों को कुली बनाया। आप लोग भी लगे रहो, यह सुनहरा अवसर दुबारा मिल सकता है क्योंकि अभी भी उन लोगों के वंशज तो कहीं होंगे ही चिन्ता क्या है॥

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  10. Koi Raj Thakre se puchhe ki us ke pitaji ke pitaji ke pitaji kahan paida hue the aur kahan kahan dhakke khaa kar mumbai pahunche. Pareshaani yeh hai ki Raj Thakre abhi jawan hain aur voh chaahate hain ki unhe rajnitikaar maan liya jaye. Unhe ek jhunjuna dedo kisi board voard kaa chairman ya santri banaa do voh chup ho jayenge

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    i.e 2008 Shradh begins from 16th Sept’08 with Pitru Paksha Shraddh,Shradh is the annual rituals dedicated to dead parents, relatives and ancestors
    that are performed in the Krishna Paksha
    of the Ashwin month in Hindi calendar, Shradh should be performed with a pious mind, Both male and female relatives of the dead can perform the rituals.

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  13. Raj's statement is ethical and not political. He is always describing the Marathi person mind and he is correct.
    The people from outside are missusing their designations and positions. Why most of higher positions in jobs occupied by outsiders? Why your organization management not having Marathi people? Because outsiders always try to pull down legs of Marathi Manus.Thats why Marathi manus is in the dark of dreams. And Marathi manus do not want such people in Maharastra.

    Also if all the other communities can live in harmony and peace in Maharashtra, why cant the Outsider do that. Gujratis, Parsis, South Indians have shifted to Maharashtra and have followed and respected the tradition and culture of Maharashta and so do Marathi people for their culture. But Biharis and people from UP (North Indians) try to scathe a force and try to show that their tradtion and culture is above others which is unacceptable. This is the truth.

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  14. Gyandotcom5:02 PM

    महाराष्ट्र नव निर्माण सेना या महाराष्ट्र विनाश सेना।

    आज कल राज ठाकरे के पास कोइ काम नही रहा करने को शायद उन्की पार्टी को चंदे की कमी हो गई हे इसलिये कभी बडे बडे फ़िल्म अभिनेताओं के सार्वजनिक टिप्पणियों पर अपनी राजनितिक रोटियाँ सेंकने की कोशिश करते हें। क्या राज ठाकरे अकेले मुम्बाई के एक मात्र मराठी मानुस हें। क्या मराठी सभ्यता यही सिखाती हें। ये तो भारतीय सँविधान के विरुद्ध हें। राज ठाकरे को शायद अपने मराठी होने की काबलियत पर पूरा शक हें। वागिश सारस्व्त प्रव्क्ता (महाराष्ट्र नव निर्माण सेना) का कहना हे कि ये गुन्डा गर्दी जायज हें ये नव निर्माण से पहले कि सफ़ाई यानि मुम्बाई कि 210 बसो को जलाना, दुकानों मे तोड फ़ोड करना, बेगुनाहों को सरे आम मार पिटाई करना, लूटपाट व सरेआम पत्रकारों व मिडियाकर्मी को मारना उन्के ओ बी वेन को आग लगाना महाराष्ट्र नव निर्माण सेना का सँवेधानिक अधिकार व सफ़ाई अभियान हे। क्या वाक़ई मे महाराष्ट्र नव निर्माण सेना महाराष्ट्र व मराठी लोगो के सुख दुख कि साझेदार हें। शायद तभी इतनी खुले आम हो रही गुन्डा गर्दी को जायज ठहराया जा रहा हे। दुकानों के बोर्डों को मराठी मे लिखने कि खुले आम धमकी देना। ओटो चालको के ओटो को आग लगा देना, ये सब एक छुटभैये नेता के लिये जिसका कोइ वजूद या अस्तित्व एक देश द्रोहि का हें। जो इन्सान को इन्सान से लडा के अपनी मुफ़्त कि राजनीतिक रोटियाँ दुसरो के पेट पे लातमार कर सेंक रहा हें। ये कैसा मराठा हें। ओर ये कैसी मराठी सँस्क्रिति हें। ये कैसा महाराष्ट्र हें। राज ठाकरे कानून व देश से उंचे नही हें। न ही वो कोई महान व्यक्तित्व हें सीधे श्ब्दो मे वह एक विषधर हें जो अपनी जुबान के ही नही आपितु शारिरिक रुप से विष्पुरुष हें जो पुरे देश मे राज्यवाद व भाषावाद का सहारा लेकर फ़ूट डालो ओर राज करो की नीति से पुरे देश को खोखला कर रहे हें। महाराष्ट्र व मुम्बाई को जलाने वाला ओर कोई नही सिर्फ़ ओर सिर्फ़ राज ठाकरे हें। एक आम आदमी अब महाराष्ट्र मे बिल्कुल सुरक्षित नही हें जहां राज ठाकरे जैसे छुटभैये नेताओ के गुन्डे सरे आम घिनोने काम कर रहे हें। खुलेआम कल्याण व मुम्बई रेल्वे स्टेशनों से लोगो से पुछा गया कोंन कोंन मराठी हे वो बाहर चला जाये। ओर बाकी लोगो को जिनमे ओरते व छोटे बच्चो के साथ बदसलूकी छेड़छाड़ व मार पिटाई की गयी। क्या जो लोग मुम्बई घूमने व किसी कामवश वहाँ आये थे वे ना तो किसी परिक्षा के विद्यार्थी थे ना ही किसी के साथ उनका कोइ सरोकार था उन के साथ महाराष्ट्र नव निर्माण सेना के कार्यकर्ताओं ने किस लिये बदसलूकी, छेड़छाड़ व मारपीट कि गई। उस परिवार का महाराष्ट्र नव निर्माण सेना के कार्यकर्ताओं से क्या लेना देना। इस का ज़िम्मेवार कोंन? एक चने बेचने वाले को सरे आम लहुलुहान किया गया, उसे मारा पिटा गया, ओर उस की दुकान मे लूट्पाट करके दुकान को आग के हवाले किया गया। क्या उस के बीवी बच्चे नही थे।

    कल रात 3 बजे से जो मुम्बई मे आगजनी लूट्मार,व तोडफ़ोड महाराष्ट्र नव निर्माण सेना के कार्यकर्ताओ ने शुरु कि हे ये आग थमने वाली नही हे। राज ठाकरे ने खुद कहा हे कि वो इस मुद्दे को छोडेगे नही। यानी मुम्बैइ अभी ओर जलना बाकी हे शायद राज ठाकरे महाराष्ट्र को जला के बर्बाद कर के फ़िर से नव निर्माण करेगे। तभी वे खुले आम कहते फ़िरते है ये तो सिर्फ़ ट्रेलर हे पिक्चर अभी बाकी हे। वाह रे नेता ओर राज कि घटिया "राज नीति"।

    यदि राज ठाकरे वाकई महाराष्ट्र व मुम्बई वासीयो के शुभचिन्तक हे, तो स्वंय मिडिया के सामने आके बोले कि उन्होने स्वयम महाराष्ट्र व मुम्बई वासीयो के लिये आज तक क्या किया हें ।

    यदि राज ठाकरे वाकई महाराष्ट्र व मुम्बई वासीयो के मसिहा हें तो सबसे पहले हर स्कुल मे से english भाषा को महाराष्ट्र से बाहर जाने का टिकिट दे।यदि राज ठाकरे वाकई मराठी भाषा से इतना प्रेम करते हे तो हर software company or call centre मे हिन्दी व english भाषा कि जगह मराठी भाषा अभी तक क्यो नही लागु की गइ हर काम मराठी मे क्यो नही किया जाता व सिखाया जाता।

    यदि राज ठाकरे वाकई महाराष्ट्र व मुम्बई वासीयो के शुभचिन्तक हे। तो सबसे पहले दुसरे राज्यो से आये लोग जो हर बिल्डिंग मे दिन रात चोकीदारी करते हे, ऊन्हे महाराष्ट्र व मुम्बई से बाहर भेज़े व स्वंय हर मराठी भाषी बिल्डिंग मे दिन रात चोकीदारी करे।

    यदि राज ठाकरे वाकई महाराष्ट्र व मुम्बई वासीयो के शुभचिन्तक हे। तो सबसे पहले दुसरे राज्यो से आये गरीब मजदूरो को महाराष्ट्र से बाहर भेज़े व स्वंय हर मराठी भाषी मजदूरो का काम करे।

    यदि राज ठाकरे वाकई महाराष्ट्र व मुम्बई वासीयो के शुभचिन्तक हे। तो सबसे पहले दूसरे राज्यो से आये सब्जियों को बेंचने वालो को महाराष्ट्र से बाहर निकाले व स्वंय हर मराठी भाषी सब्जियों को बेंचने का काम करे।

    यदि राज ठाकरे वाकई महाराष्ट्र व मुम्बई वासीयो के शुभचिन्तक हे। तो सबसे पहले दुसरे राज्यो से आये हर उस श्ख्स को बाहर निकाले। जितने भी मराठी भाषी देश के दुसरे राज्यो मे काम करते हे व कई सालो से वहाँ बसे हुए हे उन्हें वापिस महाराष्ट्र भेजा जाये। दिल्ली व उत्तर भारत मे ज्यादातर मराठी भाषी वर्षो से बसे हें । उनहे वापिस महाराष्ट्र भेजा जाये।

    यदि राज़ ठाकरे वाकई महाराष्ट्र व मुम्बई वासियों के शुभचिन्तक हे। तो पहले वे ये करे।

    व हर मराठी भाषी जो उत्तर भारत के कई शहरों मे रोज़ी रोटि कमाने आये हे उन्के साथ भी फ़िर ऐसा ही भाषा का भेद भाव किया जाये। जैसा महाराष्ट्र मे राज ठाकरे व उनकी महाराष्ट्र नव निर्माण सेना हर उत्तर भारतीयों के साथ कर रही हें। जितने भी बडे बडे व्यापार घराने अम्बानी व बडे बडे अभिनेता को भी महाराष्ट्र से बाहर निकाला जाये।

    जितना पैसा बाहर से आये लोगो ने महाराष्ट्र का निर्माण करने मे लगाया ये उन्हे सब वापिस कर दे
    उस्के बाद राज ठाकरे महाराष्ट्र का नव निर्माण करे। तब महाराष्ट्र आज का महाराष्ट्र नही होगा किन्तु बिहार से भी बदहाल होगा ओर शायद राज़ ठाकरे वाकई महाराष्ट्र व मुम्बई वासीयो के लिये यही सप्ना सन्जोये हुये हे। पुरा महाराष्ट्र से सारे लोगो को बाहर निकाला जाये, सिर्फ़ ओर सिर्फ़ मराठी ही महाराष्ट्र मे रहे। तब महाराष्ट्र आज का महाराष्ट्र न होगा आपितु दूसरा बिहार बन चुका होगा। क्योंकि तब "महाराष्ट्र नव निर्माण सेना" का राज होगा।

    तभी उन्होने अप्नी पार्टी का नाम भी बहुत सोच के रखा हे "महाराष्ट्र नव निर्माण सेना " ये सेना महाराष्ट्र नव निर्माण तो शायद ही करे,हाँ विनाश ज़रूर कर रही हे। अपनी फ़जूल कि टिप्पणियों व कार्यकर्ताओं के द्वारा। यही हे राज ठाकरे का 5 वर्षिय योजना पत्र (मेनीफ़ेस्तो)।

    राज ठाकरे कि नीति अन्ग्रेज़ो कि हें फ़ुट डालो ओर राज करो व मराठी व उत्तर भारतीयों के साथ इसी तरह से अपनी खोख्ली गन्दी राजनिती से मराठी व उत्तर भारतीयों को एक दुसरे से लडवाके अपने को एक महान नेता साबित करना चाहते हे तो ये ऊनकी मुर्खता होगी।

    राज ठाकरे महाराष्ट्र व मुम्बई वासीयो के शुभचिन्तक नही हें। कोइ भी नेता एक आम आदमी का शुभचिन्तक कैसे हो सकता हे?
    यदि राज़ ठाकरे वाकई महाराष्ट्र व मुम्बई वासीयो के शुभचिन्तक हे तो वह स्वंय अपने plot (school or collage) पे महाराष्ट्र व मुम्बई वासीयो के लिये रोज़्गार के साधन क्यो नहीं बनाते। उन्होने वहाँ के किसानो के लिये कया किया। कितने किसानो ने आत्मह्त्या कि क्या राज ठाकरे एक भी किसान के घर पे गये, क्या राज़ ठाकरे ने एक भी किसान के परिवार को अपनी तरफ़ से एक रुप्ये का भी मुआवजा नही दिया।

    यदि राज़ ठाकरे वाकई महाराष्ट्र व मुम्बई वासीयो के शुभचिन्तक हे तो वह स्वंय बताये की उन्होने महाराष्ट्र व मुम्बई वासीयो के लिये क्या किया हे।यदि महाराष्ट्र व मुम्बई वासीयो के लिये उन्होने कुछ भी अच्छा किया हें। तो स्वंय मिडिया मे खुले आम बोलें। यदि महाराष्ट्र व मुम्बई वासीयो के लिये उन्होने कुछ भी अच्छा नही किया हें तो उन्हे कोई हक नही हें देश के सँविधान,कानून व आम आदमी के जीवन मे खिलवाड करने के। ऐसे देश के भ्र्ष्ट नेताओं को समाज से बहिष्क्रित कर देना चाहीये।

    राज ठाकरे अपनी खोख्ली गन्दी राजनिति के चल्ते कितने लोगो की ज़िंदग़ी के साथ खेल रहे हें ये उन्हे खुद नही पता। कितने गरिबो ओर मासूम लोगो की रोज़ी रोटी उन्की गन्दी राजनिती व भाषणों की वजह से छिन्न गई। उन सब के ज़िम्मेदार ओर कोइ नही स्वंय राज ठाकरे हें। मराठी ओर गैर मराठी का ज़हर किसी ओर ने नही स्वंय राज ठाकरे ने बोया हें। ऐसे विषधर पुरुष देश के लिये सबसे बडा खतरा हें।
    एक नये राज्कीय आतंकवाद कि शुरुआत राज ठाकरे कि महाराष्ट्र नव निर्माण सेना ने कि हें जो देश के टुकडे कर रहा हें। अपने ही देश मे अब हम सब लोग मेहमान हो गये हैं। क्योंकि हम सब ने ऐसे लोगो को चुना हे देश की एकता के साथ खेलने के लिये। ओर यही लोग हम सब को इस देश मे डर के जिल्ल्त से ओर बेगुनाहों को सता के राज करेंगे। अगर आप वाक़ई मे इस देश के लिये अपने समाज के लिये अपने शहर,कस्बे,गावों,व परिवार के लिये कुछ करना चाह्ते हे अगर नही तो अपने छोटे बच्चों के लिये हि सही ऐसे नेताओं को बिल्कुल वोट ना दें। जो आने वाले कल मे हमारे बच्चे को इस देश मे डर के व जिल्ल्त भरी जिन्दगी जीने के लिये मज्बुर करे। ऐसे महाराष्ट्र के नव निर्माण मे सहयोग ना दें जो नव निर्माण के नाम पर विनाश का निर्माण कर रहे है। यदि राज ठाकरे किसी आम आदमी का भला नही कर सकते तो उन्हे कोई हक नही हे समाज व आम आदमी का बुरा करने का। अगर वे किसी का पेट भर नही सकते तो उन्हे कोई हक नही हे किसी ओर के पेट मे लात मारने का।

    gyandotcom आप सभी पाठ्को से निवेदन करता हे कि इस तरह के नेताओ व कार्यक्र्ताओ कि खुलकर भरसक आलोचना कि जानी चाहिये जो आम आदमी को आम आदमी से लडा के आगजनी,लूट्पाट,मारपिट, व गुन्डा गर्दी की सभ्य समाज मे स्थापना करना चाहते हे। विकास के नाम पर विनाश लीला का खूनी खेल अब बन्ध होना चाहिये। gyandotcom, राज ठाकरे व महाराष्ट्र नव निर्माण सेना के कार्यकर्ताओ की कटु श्ब्दो मे आलोचना करता हे।

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  15. ajaykumar6:53 PM

    keep u r knowlege in u r cock ,saale desh per bozh banate jaa rahe hai up & biharis ,aagar itna hi gyan hai to up aur biahar ka vikas karake dikha

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